खबर न्यू  इंडिया (न्यूज़ डेस्क): केंद्र की मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौवें बजट को लोकसभा में रविवार को पेश किया गया, बजट 2026 को अगर समग्र रूप से पैराग्राफ में समझें, तो यह सरकार की उस रणनीति को दिखाता है जिसमें वह तात्कालिक राहत के बजाय लंबी अवधि की विकास योजना पर ज़्यादा भरोसा कर रही है. वित्त मंत्री ने पूंजीगत खर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर और कनेक्टिविटी पर जोर देते हुए साफ संकेत दिया कि ग्रोथ का रास्ता बड़े प्रोजेक्ट्स से निकलेगा. इस बजट की खासियत यह है कि इसमें लोकलुभावन किस्म की चमत्कारिक घोषणाएं भले न हों, लेकिन राजकोषीय विवेक, विकास और समावेशन के बीच संतुलन जरूर दिखता है, जिसमें भविष्य के विजन को तात्कालिक फायदों पर तरजीह दी गई है। इसकी पुष्टि वित्त मंत्री द्वारा उल्लिखित तीन कर्तव्यों से भी होती है-आर्थिक विकास को तेज करना, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और सबका साथ, सबका विकास के तहत हर वर्ग, क्षेत्र और समुदाय को अवसर देना। 

हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए भारी निवेश, आयुर्वेदिक AIIMS और मेडिकल हब जैसे ऐलान भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माने जा सकते हैं. इसके साथ ही कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं को ड्यूटी फ्री करना और रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न की समय-सीमा बढ़ाना आम लोगों के लिए व्यावहारिक राहत है, हालांकि इसका असर सीमित ही है. वहीं दूसरी ओर, बजट से सबसे ज्यादा निराशा सैलरीड मिडिल क्लास और युवाओं को हुई है. इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव न होना और महंगाई के दबाव के बावजूद कर राहत न मिलना मध्यम वर्ग के लिए बड़ा झटका है. ‘यूथ-फर्स्ट’ की बातों के बावजूद बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने वाली नई योजनाओं या ठोस जॉब इंसेंटिव की कमी साफ महसूस होती है. कुल मिलाकर, यह बजट “कल की अर्थव्यवस्था” को मज़बूत करने की कोशिश करता दिखता है, लेकिन “आज की नौकरी, आज की आय और आज की महंगाई” से जूझ रहे लोगों को अपेक्षित राहत नहीं दे पाया.

#UnionBudget2026 #UnionBudget,